विविध
त्यौहारों का बदलता स्वरूप
हमारा देश उत्सवों का देश है। इसी कारण पूरे वर्ष भर किसी न किसी उत्सव- त्योहार को …
सूफी संत और कवि रूमी के 21 सर्वश्रेष्ठ विचार
जलालुद्दीन रूमी बहुत प्रसिद्द सूफी कवि थे | इनका जन्म 30 सितम्बर 1207 में हुए थे | उनके विचारों की …
माँ मै दौडूंगा
माँ मै तुम्हारे लिए दौडूंगा जीवन भर आप मेरे लिए दौड़ती रही कभी माँ ने यह नहीं दिखाया कि मै थकी हूँ माँ ने …
महाशिवरात्रि -एक रात ” इनर इंजिनीयरिंग” के नाम
शिव नाम अपने आप में मन्त्र हैं | शिव अर्थात जो नहीं है | जो नहीं है वो असीम है …
चोंगे को निमंत्रण
चोंगा बाहरी चमक -दमक आकर्षित तो करती है, परन्तु इंसान की असली पहचान उसके गुण उसके संस्कार या उसका ज्ञान …
कुछ रचनाएँ बीनू भटनागर जी के काव्य संग्रह ” मैं सागर में एक बूँद सही” से
बीनू भटनागर जी की कवितायें भावनाओं का सतत प्रवाह है | किसी नदी की भांति यह अपना आकार स्वयं गढ़ लेती हैं …
लुटन की मेहरारु
घर में खुशी की लहर दौड़ चली| लुटन की माँ तो डीजे की धुन पर ठुमके–पर–ठुमके लगाए जा रही थी| …
मेरा शहर साफ़ हो इसमें सबका हाथ हो
मेरी एक रिश्तेदार की बीच शहर में ही बड़ी सी कोठी है. दिवाली के कोई दो दिनों के बाद मैं …
कविता -बदनाम औरतेँ
बदनाम औरतें मात्र एक कविता नहीं है | ये दर्द है उन औरतों का जो समाज की मुख्यधारा से कट …
वसंत पर कविता – Hindi poem on vasant
वसंत यानी प्रेम का मौसम , पर हर कोई इतना भाग्यशाली नहीं होता कि उसे उसका प्यार मिल ही जाए …
मन का अँधेरा
बस खड़ी थी और उसमें कुछ सवारियाँ बैठी भी हुई थीं, कण्डक्टर उसके पास ही खड़ा होकर लख़नऊ लख़नऊ की …
मनीषा जैन की कवितायें
मनीषा जैन की कवितायें आम बात कहती हुई भी खास हो जाती हैं क्योंकि वो हर संवेदना की गहराई तक …
गीली मिटटी के कुम्भकार
मेरी सहेली रागिनी मेरे घर आई हुई थी. अभी कुछ ही देर हुए होंगे कि मेरी बेटी का फोन आ …
लघुकथा -कलियुगी संतान
गली मे गठिया पीडित बुढिया घूमते घूमते थक गयी और धीरे धीरे चलते हुऐ मेरे पास आकर सुस्ताने लगी। मैने …