ग्वालियर : एक यात्रा अपनेपन की तलाश में
जिस शहर में क़रीब 50 साल पहले नव वधु के रूप में आई थी उसी शहर में हम कुछ दिन पहले,परिवार ही नहीं …
जिस शहर में क़रीब 50 साल पहले नव वधु के रूप में आई थी उसी शहर में हम कुछ दिन पहले,परिवार ही नहीं …
फोटो क्रेडिट -thelallantop.com सर्फ एक्सेल वर्षों से जो विज्ञापन बना रही है उसका मुख्य बिंदु रहता है “दाग अच्छे है …
चाँद पिता की लाडली दोहों में लिखी कविता है | दोहे हिंदी साहित्य की एक लोकप्रिय विधा है |यह मात्रिक …
“यार अपने रंग का कुछ तो करो, थोड़ी फेयर एंड लवली ही लगा लिया करो , ये रंग तो तेरा …
समकालीन कथाकाओं में सिनीवाली शर्मा किसी परिचय की मोहताज नहीं हैl ये बात वो अपनी हर कहानी में सिद्ध करती …
आदमी की भूख भी बड़ी अजीब होती है रोज जग जाती है, और कई बार तो मनपसंद चीज सामने हो …
—————– दादी ने आँगन की धुप नहीं देखी और पोती को आँगन की धप्प देखने का अवसर ही नहीं मिलता …
आठ मार्च यानि महिला दिवस , एक दिन महिलाओं के नाम ….क्यों? शायद इसलिए कि बरसों से उन्हें हाशिये पर …
पुलवामा हमले से हर भारतीय आहत हुआ है लेकिन पुलवामा हमले , एयर स्ट्राइक और पाकिस्तान के कब्जे में लिए …
जीवन एक पहेली सा लगता है | ये पहेली भी हमने ही बनायी है | और खुद ही उसमें उलझ …
भोले बाबा जो धतूरा , बेल , मदार और ना जाने कितने जहरीले फल प्रेमसे चढ़ा देने पर प्रसन्न हो …
महाशिवरात्रि यानि भगवान् शिव और माता पार्वती के विवाह की पावन तिथि | …
एक समय था जब लड़कियों के क्रश इमरान खान हुआ करते थे |लडकियाँ उन्हें खून से खत लिखा करती थीं …