विविध
दशहरा-असत्य पर सत्य की विजय का पर्व
दशहरा हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। …
आज का रावण
विजयदशमी में बुराई के प्रतीक रावण का प्रभु श्रीराम द्वारा वध किया जाता है | पर आज रावण एक नहीं …
नारी मन पर वंदना बाजपेयी की पाँच कवियायें
भारतीय नारी का प्रेम बड़ा विचित्र है भारतीय नारी का प्रेम वह विदेशियों की तरह चोबीसों घंटे करती नहीं है …
आस्थाएं तर्क से तय नहीं होतीं
दुर्गा अष्टमी पर विशेष – आस्थाएं तर्क से तय नहीं होती आज दुर्गा अष्टमी …
जुलाहा हूँ
रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)। मै पंडित नही———— तेरी मस्जिद का अजा़न, और तेरी बस्ती का जुलाहा हूँ। देख लेता हूँ सारे …
लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है ।-सूर्यकांत नागर
डॉक्टर रमेश चंद्र की लघुकथाएं सादगी से भरी हुई है। जैसा उनका सहज जीवन है, वैसी ही उनकी लघुकथाएं हैं …
स्वप्नदृष्टा युवा वैज्ञानिक डा. रविकांत- जो भारत में बना रहे हैं सिलिकॉन वैली की तरह इन्टरनेशनल प्रयोगशाला
अमेरिका की सिलिकाॅन वेली की तरह भारत को इण्टरनेशनल रिसर्च की वैश्विक प्रयोगशाला बनाने के निर्माण में साधनारत युवा वैज्ञानिक …
राम , रहीम , भीम और अखबार
सरिता जैन ये कहानी है तीन मित्रों की | उनमें से एक था मुस्लिम , एक , सवर्ण और एक …
गुरु कीजे जान कर
गुरु कीजिये जानी के , पानी पीजे छानी , बिना विचारे गुरु करे , परे चौरासी खानी || …
एक लघु कहानी —–सम्मान
आज साहित्य के क्षेत्र में सम्मान समारोह आम हो गए हैं | कोई कितना भी कलम घिस ले पर सम्मान …
“परिस्थिति “
रोचिका शर्मा चेन्नई अपनी बेटी के बी. ए. अंतिम वर्ष में दाखिला लेते ही मैने उसके लिए योग्य वर तलाशना …
नादान सी वो लड़की – प्रिया मिश्रा की कवितायें
प्रिया मिश्रासतना म.प्र. 1)नादान सी वो लड़की कब हो गई सयानी नादान सी वो लड़की पत्तो से खेलती थी पेड़ो …
लगाव (लघु कहानी)
सविता मिश्रा “बुढऊ देख रहें हो न हमारे हँसते-खेलते घर की हालत!” कभी यही आशियाना गुलजार हुआ करता था! आज …
नवरात्रि पर ले बेटी बचाओ , बेटी पढाओ का संकल्प
किरण सिंह हिन्दू धर्म में व्रत तीज त्योहार और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। हर वर्ष चलने वाले इन उत्सवों …
देवी को पूजने वालों देवी को जन्म तो लेने दो
संजीत शुक्ला नवरात्रों के दिन चल रहे हैं | हर तरफ श्रद्धालु अपनी मांगों की लम्बी कतार लिए देवी के …
रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन यानी तुष्टिकरण का मानसिक कैंसरवाद
रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) आज म्याँमार से भगाये गये लाखो लाख रोहिंग्या मुसलमान इतने शरीफ़ और साधारण नागरिक वहाँ के नही …
जरूरी है की बचपन जीवित रहे न की बचपना
वंदना बाजपेयी हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा बचपन होता है | पर बचपन की खासियत जब तक समझ में …
घुटन से संघर्ष की ओर
पंकज ‘प्रखर सरला अब उठ खड़ी हुई थी ये विवाह उसके माता-पिता और गर्वित के माता-पिता की ख़ुशी से हुआ …