विभोम स्वर व् शिवना साहित्यकी मेंरी नज़र में

शिवना प्रकाशन की दो पत्रिकाएँ ‘विभोम स्वर’और ‘शिवना साहित्यिकी’ प्राप्त हुईं | अभी थोड़ी ही पढ़ीं हैं, फिर भी उन …

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एक कदम पीछे

जीवन स्वयं आगे बढ़ता है | पर हम उससे भी आगे बढ़ने की होड़ लगा लेते हैं | इतनी तेज …

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अंतर्मन के द्वीप- विविध विषयों का समन्वय करती कहानियाँ

अभी  पिछले दिनों मैंने “हंस अकेला रोया” में ग्रामीण पृष्ठभूमि पर लिखी हुई कहानियों का वर्णन किया था | आज …

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श्राद्ध की पूड़ी

श्राद्ध  पक्ष यानी अपने परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रगट करने का समय | ये सम्मान जरूरी भी है …

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अग्नि – पथ

         हम ऐसे समज में जीने के लिए अभिशप्त हैं जहाँ रिश्ते -नाते अपनत्व पीछे छूटते जा …

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कुनबेवाला

“तुम बिलकुल जानवर हो ?”यह कह कर किसी इंसान का अपमान कर देना हम इंसानों की आदत में शुमार है …

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